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Sunday, January 10, 2021

Pain management is complete only when patient is a part of decision making.

 




Chronic pain management will see changes in the coming years. We have consistently helped patients to get right understanding of causes and pain management. It is tough to convey this message, considering the present trends of quick fix formulas yet we continue our commitment. 

Sunday, November 19, 2017

Physiotherapy को लेकर व्यापक अवधारणा

आपका फिजियो ही आपके लिए सही फिजियोथेरेपी उपचार पद्धति का सटीक चुनाव कर सकता है|

हमें मानसिकता बदलने की जरूरत है कि अन्य चिकित्सा पध्दतियों के विशेषज्ञ इसका निर्धारण करने में निपुण हैं ।

अन्य स्वास्थ्य पेशेवरों की अधिकांश सिफारिशें  "Physical Rehabilitation" के वर्तमान परिप्रेक्ष्य से अक्सर मेल नहीं खातीं |

फिजियो प्रैक्टिशनर्स के लिए भी यह आवश्यक है कि वे उपचार की योजना को अपने स्पेशलाइजेशन के लिए स्पष्ट और प्रासंगिक बनाए रखें और भ्रम पैदा न करें।
दवा के नुस्खे(Medication) अनिवार्य रूप से शारीरिक थेरेपी अभ्यास का एक हिस्सा नहीं हैं।
यह उचित है कि जब आप अपने रोगी की अपेक्षाओं को पूरा करने में सक्षम होते हैं, तो अन्य चिकित्सा क्षेत्रों से भी अधिक समर्थन और विश्वास मिलेगा तथा सभी आपकी क्षमताओं पर भरोसा करना शुरू कर देंगे।

जब तक आप IFT + US + SWD सिफारिशों का अंधाधुंध पालन नहीं छोड़ते तब तक आप रोगी और अन्य सभी चिकित्सा क्षेत्रों के विशेषज्ञों के लिए अप्रासंगिक रह सकते हैं।
www.physicalhealthconsultants.com

Saturday, February 25, 2017

भारतीय संदर्भ में स्वास्थ्य विज्ञान

  ww.physicalhealthconsultants.com

 भारत में न केवल एक महान सांस्कृतिक और भौगोलिक विविधता है अपितु हम उन कुछ देशों में से हैं, जहां कई स्वास्थ्य विज्ञान लंबे समय से सह-अस्तित्व में  हैं ।
 एलोपैथी या पश्चिमी चिकित्सा इस देश के स्वास्थ्य परिदृश्य के लिए सबसे नवीनतम विज्ञान है (सापेक्ष दृष्टि से)। होम्योपैथी भी आयुर्वेद या चिकित्सा के अन्य प्राचीन रूपों की अवधारणा के रूप में पुरानी नहीं है, तो उपचार की एक पारंपरिक तरीका नहीं है। शब्द एलोपैथी, हालांकि आमतौर पर आधुनिक चिकित्सा के लिए इस्तेमाल एक व्यापक अर्थ है।यह सबसे संगठित और शायद प्रभावशीलता में तेज है, इसलिए यह लोकप्रियता के मामले में सबसे आगे है । इस तरह पूर्व कुछ  दशकों में  स्वास्थ्य देखभाल और पश्चिमी चिकित्सा पर्याय बन गए हैं। एलोपैथी विकसित स्वास्थ्य विज्ञान है ऐसी लोकप्रिय धारणा है। यह एक विशाल सार्वभौमिक एवं अनुसंधान और साक्ष्य आधारित अभ्यास है जिसे  अंतरराष्ट्रीय संगठनों की मान्यता प्राप्त है । एलोपैथी अध्ययन की भी हर विज्ञान की तरह अपनी कुछ सीमाएं हैं और समय-समय पर अपने आप ही चुनौतियों का सामना करता एक निरंतर विकसित होता क्षेत्र है। जैसे  हाल के वर्षों में "दवा प्रतिरोध" एक चुनोती के रूप में उभरा है।
  हर मरीज को समझ लेना चाहिए कि एलोपैथिक अभ्यास विशेषज्ञता का एक क्षेत्र है और स्वास्थ्य के किसी भी पदानुक्रम का हिस्सा नहीं है।  ऐसा कोई  श्रेणीबद्ध पैटर्न मौजूद नहीं है।  अन्य चिकित्सक जैसे आयुर्वेद या होम्योपैथी चिकित्सक अपनी पद्धत्ति में निपुण हैं तथा स्वतंत्र तौर पर इलाज  के लिए अधिकृत हैं। एक एलोपैथ से यह पूछना कि हम किसी और चिकित्सक से परामर्श करें या नहीं ठीक वैसा है जैसा फुटबॉल कोच से क्रिकेट की जानकारी मांगना।
  विभिन्न स्वास्थ्य विज्ञान हैं जो समय की कसौटी पर खरी उतरी है और उन्हें  अभी भी प्रभावी होने के लिए जाना जाता है। प्राकृतिक चिकित्सा, एक्यूप्रेशर, एक्यूपंक्चर, पंचकर्म, योग थेरेपी (चिकित्सकीय योग) और सिद्धा जैसे अन्य विज्ञान भारतीय लोगों को ज्ञात हैं। आमतौर पर पुरानी बिमारियों के वैकल्पिक उपचार की चर्चा में आयुर्वेद, होम्योपैथी, पारंपरिक चीनी चिकित्सा और यूनानी जैसे शब्द सुनने को मिल जाते हैं।
  फिजियोथेरेपी का विज्ञान चुपचाप पश्चिमी चिकित्सा की छाया से बाहर विकसित हो रहा है और अपनी विश्वसनीयता बना  रहा है एक स्वतंत्र  क्षेत्र के रूप में है।  यह  पद्धति मानव एनाटॉमी, फिजियोलॉजी, बायोमैकेनिक्स, पैथोलॉजी आदि के ज्ञान का एक होनहार समामेलन है।इसमें आधुनिक चिकित्सा और योग, टीसीएम आदि का ज्ञान इस्तेमाल करते हुए चुंबकीय, इलेक्ट्रो, एक्सरसाइस, मैन्युअल टेक्निक्स चिकित्सा से उपचार किया जाता है।यह एक संपूर्ण विज्ञान है जिसमे समकालीन स्वास्थ्य समस्यायों का विभिन्न पद्धतियों से उपचार होता है।
  फिजियोथेरेपी  पाठ्यक्रम अनुसन्धान पर आधारित है और इसमें काम आने वाले उपकरण पूरी तरह सुरक्षित हैं। मैनुअल फिजियो उपचार में इस्तेमाल वैद्य तकनीक या आयुर्वेद की मालिश की तरह कुछ अन्य स्वास्थ्य पेशेवरों द्वारा इस्तेमाल की तकनीक के साथ तुलना आकर्षित कर सकता है, लेकिन वास्तव में तकनीक अलग़  हैं। एक फिजियोथेरेपिस्ट द्वारा भौतिक पुनर्वास के दौरान "व्यायाम" शारीरिक स्वास्थ्य के मुद्दों के लिए इलाज का सबसे विकसित तरीका है और अच्छी तरह से तैयार रूपों में से एक है और यह  हृदय (कार्डियक रिहैब ) जैसे अन्य स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं पर लागू किया जा सकता है। फिजियोथेरेपी की जड़े कई चिकित्सा पद्धतियों से प्रेरित हो कर विकसित हुई हैं। आधुनिक तकनीकों का उपयोग जिसमें विशेष तौर पर बायोमैकेनिक्स का ज्ञान निश्चित रूप से स्वास्थ्य देखभाल के भविष्य के लिए एक वरदान है।
  अभी भी लोगों के बीच फिजियोथेरेपी के बारे में थोड़ा अविश्वास है। श्रेणीबद्ध विचारधारा से बाहर विश्वसनीयता के शिखर तक जाने के लिए एक लंबा रास्ता तय करना है। एक बात तय है कि पदानुक्रम बनाने का कोई औचित्य नहीं हर पद्धति की अपनी विशेषता है और अपनी सीमायें हैं।  

                                  Dr. Shailendra Kumar Saxena PT 
                                  Senior Consultant Physiotherapist 
                                  
                                    https://g.co/kgs/H6DSBS